Monday, May 13, 2013

आखरी पैगम्बर

मैडम सलमा खां,  आपने इस्लाम को पढ़ा है इसलिए आप बहीं तक सीमित होकर रह गयी हो, आपको आप का अल्प ज्ञान मुबारक .... मैडम पहले सभी धर्मो का अध्ययन करो, और किसी जीवित गुरु से उसकी व्याख्या समझो, हिंदूओ में एक कहाबत है "पढ़े से काढ़ा ज्यादा गुणी है", इतिहास साक्षी है, अकबर पढ़ा नहीं काढ़ा था, वह मुग़ल वंश का सबसे अच्छा शासक था, सम्राट अशोक भी पढ़ा नहीं था, उसने बौध धर्म को विश्व पटल पर स्थापित किया !  न ही चन्द्रगुप्त मौर्य  पढ़ा लिखा था, और कवीर से बड़ा भी कोई संत हुआ है क्या ? स्वयं  मोहम्मद साहव भी पढ़े लिखे नहीं थे ! ...........मैंने जिनके भी नाम लिए हैं यह कोई भी लकीर के फ़क़ीर नहीं थे. इन्होंने विषय के मर्म को पहचाना है और हवा के रुख को जाना, इसलिए इन्होंने हवा का रुख बदल दिया ! .......बांकी आप की मर्जी .. वो जब आएगा तो आप से खुद निपट लेगा मैं आप से पंगा क्यों लूं ? मैं पहले ही कह चूका हूँ हो सकता है मुस्लिम उसको पहचानने से इंकार कर दें . ......... यह बात कुछ उसी तरह हुई " रात को आप कही जाने के लिये निकलो और बच्चो से कह दो कि अब सुबह को आयेंगे ! संयोग से आप को जाने का कोई साधन ही न मिले और आप घर लौट आयें तो आप के बच्चे दरवाजा ही न खोले और कहे आप तो आ ही नहीं सकती क्यों की उनकी माँ कह गयी है की वो सुबह आएँगी ".....मैडम राजनीति विज्ञान में क्या आपने संप्रभुता की परिभाषा पढ़ी है, क्या खुदा इस जगत का संप्रभु है या नहीं ?  ...... हाहाहा       

राशीद साहब मोहमद साहब अरब जगत के आखिरी पैगम्बर हैं , न कि विश्व जगत के !, विश्व जगत में अभी और भी पैगम्बर होंगे .............. क्या समझे ? जिसकी जमीं में कुछ पैदा ही नहीं होता बो बन्दे मातरम क्या जाने !!!!!!!!!

राशिद भाई , मोहमद साहब से पहले भी पैगम्बर आये, और फिर आ रहा है क्योकि अब हालात बदल चुके हैं ......नयी विधि और विधान दिया जाना है तो उसे आना ही पड़ा .........इतना हो सकता है जैसे मोहमद साहब को उनके वंसज नहीं पहचान पाये और पहले खलीफा, सुन्नी में हुये फिर ऐसा हो सकता है मुस्लिम कोम उसको पहचानने से इंकार कर दे या हिन्दू और ईसाई, उसको सूली पर चढ़ा दे पर वो आ चूका है....क्योकि 21 शताव्दी हिन्दुस्तान की है और हिन्दुस्तान विश्व गुरु होगा ....... पर वो किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं होगा ..

Friday, May 10, 2013

धर्म एक धोखा ........



ऐसा धर्म बेकार है, जिसका कोई पालन ही नहीं करता. बस धारण कर लेता है. धारण किये किये घूमता रहता है. धारण करके रेप करता है, धारण करके लड़कियां छेड़ता है, धारण किये किये भ्रस्टाचार करता है, ज़रूरतमंद का हक मारता है, जाति पाती के नाम पर अत्याचार करता है. इंसानियत की भी बलि दे देता है धर्म के नाम पर. दूसरों के धर्म से जाति से, देश से नफरत करता है. ये नफरत सिखाने वाला कौन सा धर्म है. ये रेप करवाने वाला, बेईमानी करवाने वाला, अत्याचार करवाने वाला, दंगे करवाने वाला. ये धर्म सड़ा हुआ है बेकार है, ढोंग है, मन का भ्रम है. दरअसल, आपका धर्म बेकार है. सदियों पुराना और वाहियात है. आपको अंधा बनाने वाला है. जिसे आप अतीत के सम्मान के नाम पर ढो रहे हैं. ये वैसा है जैसे कोई बीसियों साल एक ही कपड़ा पहनता रहे. चाहे घिस जाए, उधड़ जाए, तार तार हो जाए. पर अतीत से प्रेम के नाम पर ढोता रहे. ऐसे आदमी को हम साइको कहेंगे. संवेदनशील नहीं. आप भी वहीं पहुच चुके हैं. आपका धर्म आपको मोह का त्याग नहीं सिखाता? पुराने का अंत और नए का जन्म नहीं सिखाता? आपका धर्म आपकी मूर्खता है. आपके लिए तो धर्म तर्कहीन है, दृष्टिहीन है, धर्म अच्छा भी हो पर आपके लिए तो बस अनुसरण है. जन्म के आधार पर आप कैसे हिन्दू, मुसलमान, सिखसाई, बौद्ध और जैन हो सकते हैं. मुहम्मद जन्म से मुसलमान नहीं थे, गुरु नानक जन्म से सिख नहीं थे. ईसा शुरू से ईसाई नहीं थे. , ईबुद्ध बौद्ध नहीं थे. लेकिन आप जन्म से हो. क्योंकि आप अंधे अनुयायी हो. आप ने कभी कुछ तय ही नहीं किया. अरेंज मैरिज की तरह जिस लड़की से फेरे करा दिए गए आपने शादी कर ली. लड़की तो कम से कम आपकी जमाने की थी. ये धर्म तो सदियों पुराने हैं मेरे दोस्त. आपके साथ गहरा अन्याय हुआ है. जागो, एक बार आखें खोलकर दुनिया देख तो लो. कब तक यही पुराने चीथड़े पहन कर घुमते रहोगे. नए कपडे लत्ते पहनो यार अपने मन के. ये क्या हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई और पता नहीं क्या क्या बने घूम रहे हों. आगे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सिया, सुन्नी भी बने हो. इंसान बन के देखो मज़ा आएगा. एक बार सोच करके तो देखो कि क्या ज़रूरत है अब इसकी. एक बार कल्पना तो करो एक दुनिया की जहां कोई धर्म नहीं, कोई जाति नहीं. कोई जन्म से हिन्दू नहीं. कोई मुसलमान नहीं. कोई पंडित नहीं, कोई शूद्र नहीं. कोई छोटा नहीं. कोई बड़ा नहीं. कोई अलग नहीं. सब इंसान. एक जैसे. विश्व बंधुत्व का नाम तो सुना होगा भाई.