Saturday, August 9, 2025

व्यक्तिगत बात

 भ्राता जी,


मैंने इस तरह के मूर्खतापूर्ण वीडियो बनाने वालों की सच्चाई जानने के लिए अपने जीवन के 08 साल (2010-2018) लगा दिए। मैं 100 बातों का एक उत्तर देता हूँ।


उच्च जातियाँ बुद्धि, धन-दौलत और शक्ति में शूद्र जातियों से आगे हैं। वे इस तरह के पाखंड के प्रचार-प्रसार में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह उनका मनोरंजन है।


शूद्रों ने उस विद्या को जाना ही नहीं, जिसके कारण उच्च जातियाँ उच्च हुई हैं। शूद्रों की सारी योग्यता खुद को उच्च दिखाने में होती है, इसलिए वे आपस में लड़ते रहते हैं और लगभग 6500 जातियों में बँट गए हैं। इन्हें बाँटने वाला कोई और नहीं, ये खुद आपस में लड़कर एक-दूसरे से अलग हुए हैं।


उच्च जातियों में आज भी संयुक्त परिवार प्रणाली पायी जाती है, जबकि शूद्र जातियों में संयुक्त परिवार प्रणाली न्यूनतम है।


उच्च जातियों ने अपने परिवार और समाज की एकता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट बनाए और उन ट्रस्टों को अनुदान देते हैं। इन ट्रस्टों में कुछ बुद्धिजीवी शूद्रों का शोषण करने की विभिन्न आर्थिक नीतियाँ बनाते रहते हैं और सरकार के माध्यम से उन्हें लागू करते हैं।


शूद्र समाज अपनी मेहनत की सारी कमाई इन आर्थिक योजनाओं में लगाता है। इस कमाई को फिर हड़प लिया जाता है। केवल बड़े मामले प्रकाश में आते हैं, छोटे मामलों की कोई FIR नहीं होती। (नवनीत का फ्लैट आवंटन का मामला ले लो, इस प्रकार यह इकलौता मामला नहीं है, कोर्ट में ऐसे मामलों की भरमार है)


उदाहरण के लिए, सुब्रत सहाय का मामला, जो फुटकर दुकानों से ₹10-10 इकट्ठा करता था। हमारे समाज के लोग ही इसे इकट्ठा करके जमा करते थे। अंतिम परिणाम क्या हुआ, आपको पता होगा या मैं बताऊँ? सारा पैसा उसने उड़ा दिया। एक सुब्रत सहाय जेल गया, परंतु अपने पूरे खानदान को बना गया।


मूल विषय पर लौटते हैं। इस प्रकार के वीडियो उच्च जातियों द्वारा बनाए या बनवाए जाते हैं, ताकि शूद्र जातियाँ मानसिक रूप से कुंठित रहें और झूठे अहंकार से भर जाएँ कि वे सब जानते हैं, जिन्होंने इस प्रकार के थर्ड क्लास वीडियो देख लिए हैं। ऐसा वीडियो बौद्धों द्वारा बनाए जाते हैं, बौद्ध संघ में आज भी उच्च जातियों के भिक्षुओ का ही बोल वाला है 👏 इसलिए इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण वीडियो से दूर रहे 


 इस प्रकार के वीडियो देखकर शुद्र आपस में ही लड़ते रहते हैं—जिन्होंने वीडियो देख लिया और जिन्होंने नहीं देखा। यह बहुत उथले दर्जे की योग्यता है। बल्कि, इसे योग्यता भी नहीं कहना चाहिए, यह मात्र एक काल्पनिक जानकारी है।


मेरी ऐसी वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है, इसलिए मुझे इस तरह के वीडियो न भेजें। मैं अपना कोई वीडियो भी आपको नहीं भेजूँगा। मैं अपने वीडियो सोशल मीडिया ग्रुप में शेयर करता हूँ। आपकी इच्छा हो तो देख लें, न हो तो कोई बात नहीं।


मेरे पास 5-6 दर्जन ग्रुप हैं, जिन्हें मैं कभी-कभार ही देखता हूँ। मैं व्यक्तिगत मैसेज पर ध्यान देता हूँ और जो लोग व्यक्तिगत मैसेज में फालतू चीजें भेजते हैं, उसे भी नहीं देखता, अगर वह उनके स्वयं द्वारा निर्मित न हो।


आप चाहें तो अपने विचार मियांपुर ग्रुप में भेज सकते हैं, परंतु व्यक्तिगत मैसेज में सुचिता रखें, ताकि मैं आपके मैसेज को गंभीरता से ले सकूँ।


सामाजिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

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