Saturday, June 20, 2026

महर्षि दयानंद सरस्वती ने परिवार नामक संस्था को प्रमोट किया है🙏

 टाइटल: परिवार संस्था, नियोग और कुलीनता: भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं पुनरुत्थान 🙏


महर्षि दयानंद सरस्वती ने परिवार नामक संस्था को प्रमोट किया है🙏  

नियोग और नियोग सहित दत्तक ग्रहण को स्वीकार किया है 🙏  


नियोग और नियोग सहित दत्तक ग्रहण को समझ समझ लिया जाए🙏  


1. नियोग तब होता है जब पुरुष नपुंसक हो, अथवा अनुपस्थित हो और उसकी पत्नी स्वस्थ हो, और परिवार को बच्चों की आवश्यकता हो तो परिवार की इच्छा से स्त्री, अथवा परिवार की जानकारी में स्त्री परिवार के अंदर अथवा संयुक्त परिवार के अंदर किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर बच्चा प्राप्त कर सकती है🙏 इसके कारण परिवार और संयुक्त परिवार मजबूत होता है, किस तरह के रिश्तों को स्वीकार करने से, सामान्य अवस्था में प्रेम प्रसंग पर भी कोई आपत्ति नहीं होती है परिवार मजबूत होता है🙏 धृतराष्ट्र और पांडु की उत्पत्ति नियोग से हुई, वेदव्यास परिवार का ही सदस्य था, इसके विपरीत परिवार के बाहर के व्यक्ति से युधिष्ठिर भीम अर्जुन नकुल सहदेव की उत्पत्ति हुई थी🙏  


2. नियोग सहित दत्तक ग्रहण :- जब पत्नी बाँझ हो, तो पुरुष अपनी इच्छित स्त्री के साथ, उसकी सहमति अथवा उसके पुरुष साथी(पति)की सहमति से शारीरिक संबंध बनाकर बच्चा प्राप्त कर सकता है, और फिर उसे गोद ले सकता है इससे भी पारिवारिक संबंध मजबूत होता है, सामान्य अवस्था में प्रेम प्रसंग पर कोई आपत्ति नहीं होती है, पांचाली का उदाहरण एक ही स्त्री से पांचो भाइयों ने बच्चे पैदा किया🙏  


महर्षि दयानंद सरस्वती ने इसी का विस्तार किया है स्वीकार किया है सत्यार्थ प्रकाश में, महर्षि दयानंद सरस्वती ने बाहरी संबंधों को वर्जित किया है, परंतु परिवार के अंदर के संबंधों को स्वीकार किया है, क्योंकि यह परिवार और संयुक्त परिवार के प्रेम को बढ़ाने वाला है 🙏  


आचार्य रजनीश ने पुराने मॉडल को ही स्वीकार किया है, उन्होंने नियोग के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों ही संबंधों को स्वीकार किया है, प्रेम को प्रमुखता दी है 🙏  


साम्राज्य विस्तार के अंतर्गत, 15वीं शताब्दी में चर्च के पादरियों ने नया नियम बनाया, और घर की स्त्रियों के साथ संबंध बनाने को वर्जित कर दिया, और बाहरी स्त्रियों के साथ संबंध बनाना सामान्य कर दिया, इसके कारण क्रिश्चियन सैनिकों को सुविधा हो गई, उनमें धार्मिक रूप से अपराध बोध नहीं होता था, परंतु इस कारण से अंग्रेजों की 70 कॉलोनी में वहां ही संस्कृति पूरी तरह से नष्ट हो गई, उनके साहित्य को भी अलट-पलट दिया गया 🙏  


भारत में कुलीन प्रथा रही है, कुलीन प्रथा का मतलब होता है कुल के अंदर के संबंध, मुस्लिम समाज में भी कुलीन प्रथा रही है, अर्थात कुल के अंदर के संबंध, मुसलमान निर्वाध रूप से भारत पर शासन करते रहे सामाजिक रूप से कभी किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई, परंतु अंग्रेजों द्वारा थोपी गई क्रिश्चियन व्यवस्था के कारण यहां का सामाजिक ढांचा तहस-नहस हो गया और अंग्रेजों का विरोध होने लगा, मुसलमानों ने जिन भारतीय स्त्रियों से शारीरिक संबंध बनाएं उन्हें पत्नी का दर्जा दिया परंतु अंग्रेजों ने जिन स्त्रियों के साथ शारीरिक संबंध बनाए उन्हें पत्नी का दर्जा नहीं दिया🙏  

बल्कि रेड लाइट एरिया बनाएं, जिसको समाज में गन्दा की दृष्टि से देखा जाता था, इसके विपरीत गणिका, और तवायफ तहजीब के लिए जानी जाती थी🙏  


सामाजिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा उपरोक्त सभी का गहन अध्ययन के पश्चात उपरोक्त दृष्टिकोण को रखते हैं🙏  


हमारी अगली पीढ़ी हमारे युवा, उनका शारीरिक और मानसिक सुख शांति के लिए, महर्षि दयानंद सरस्वती, और आचार्य रजनीश के ही मॉडल को स्वीकार करना पड़ेगा🙏  


15वीं शताब्दी में रोमन चर्च के पादरी द्वारा जो नियम (incest taboo) बनाया गया है, इसका पुरजोर विरोध करना पड़ेगा तभी हमारे परिवारों और संयुक्त परिवारों में प्रेम बढ़ेगा🙏  


नातेदारी के संबंध ससुराल के संबंध होते हैं, कई बार इस संबंध भी कुलीनता में आते हैं 🙏 परंतु कुल के बाहर के संबंध, कुलहीनता कहलाती है, मुसलमानों ने कुलीनता और कुलहीनता दोनों का समान रूप से पालन किया, परंतु अंग्रेजों ने केवल कुलहीनता को ही बढ़ावा दिया, और ब्राह्मणों के माध्यम से हमारे पारिवारिक संरचना के ग्रंथो को भी उलट पलट कर दिया 🙏  


भारतीय परिवेश में केवल सपिंड वर्जित था, जैसा ऋग्वेद के दशम अध्याय यम-यमी के प्रकरण में मिलता है, पिता के साथ संबंध को नैतिक रूप से प्रतिबंधित किया गया, इस सिद्धांत के आधार पर की फल अपना वृक्ष नहीं खाता नदी अपना पानी नहीं पीती, परंतु इस प्रेम में वात्सल्य और कर्तव्य वर्जित नहीं था, इसलिए ब्रह्मा के अस्तित्व को बनाए रखा गया, उनको साहित्य से नकारा नहीं गया है 🙏  


बच्चा प्राप्त करने के लिए, एवं स्थाई रूप से शारीरिक संबंध, और भावात्मक संबंध को बनाए रखने के लिए, माता की तरफ तीन पीढ़ी तक और पिता की तरफ सात पीढ़ी तक कुल माना जाता था और विवाह संबंध भी इनके अंदर ही किए जाते थे, इसलिए भारत की जाति व्यवस्था काफी मजबूत है, जाति व्यवस्था की मजबूती का कारण यही है, यह दूसरी बात है कि इस जाति व्यवस्था के कारण, परस्पर जातियां एक दूसरे का शोषण करने लगी 🙏  


इसलिए आर्थिक समानता का मूवमेंट चलाया जाना आवश्यक है, कुलीनता को बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि परिवार संयुक्त परिवार में प्रेम बढ़े, अप्राकृतिक शारीरिक संबंध, लेस्बियन और गे की आवश्यकता ना पड़े!


ट्रांसजेंडर संबंध, प्राकृतिक रूप से प्रकृति के मारे हुए हैं, उनके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, अर्जुन का ट्रांसजेंडर होना इसी बात की ओर इशारा करता है🙏  


भारतीय संस्कृति में महाभारत और रामायण ग्रंथ का महत्व इसीलिए है, यह भारत की संस्कृति को दर्शाते हैं, और सामाजिक विवाद को भी, उसके परिणाम को भी 🙏  


जागो युवाओं जागो, डेटिंग के लिए OYO के होटल का प्रयोग करना बंद करो, यह दारू के ठेके की तरह, तुम्हारे मोहल्ले की गली में खुलने लगे हैं, तुम्हारी संस्कृति पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी, यदि तुम किसी लड़की के साथ, डेटिंग पर हो, तो वह किसी की बहन होगी, यह तुम्हारी बहन के ऊपर भी लागू होता है, इसे पारिवारिक प्रेम नहीं बढ़ता, संयुक्त परिवार का प्रेम नहीं बढ़ता है, अनावश्यक रूप से आर्थिक प्रतियोगिता बढ़ती है, होटल वालों के मजे बढ़ाते हैं, तुम्हारी सामाजिक, शारीरिक और मानसिक हानि होती है, परिवार और संयुक्त परिवार का संबंध पूरी तरह से नष्ट हो जाता है, कुलीनता समाप्त हो जाती है 🙏  


आप सभी युवा हो चीजों को समझते हो, जो ना समझ में आए मुझसे पूछ सकते हो, लेकिन केवल चैटिंग में🙏  


सामाजिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 🙏



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